अक्टूबर: किसी रिश्ते का एक आख़िरी सेंटेंस...


अंधेरी सड़क पर बाइक पर आता, जहां चेहरा नहीं दिखता. लेकिन दुनिया दिखती है हेलमेट के भीतर से. अंधेरे के भी अपने फायदे हैं. उजाले का अंधेरा भी दिख जाता है.

बाइक पर बैठकर आते डैन को भी नहीं मालूम 'डैन कहां है'. इस डैन को दुनिया नहीं दिखी. उसे एक लास्ट सेंटेंस दिखा- वेयर इज डैन?

'मनवा रुआं सा, बेकल हवा सा... जलता जियरा चुभती बिरहा'




डैन है कोई, जो चिड़चिड़ा रहा है. वजह उसे नहीं मालूम. यकीन करो, बहुत कुछ दुनिया को जो नौटंकी लगता होगा- वो बेवजह होता है. चीज़ें बेवजह हो सकती हैं.

लेकिन फिर भी लोगों को लगा कि ये जो कर रहा है, इरिटेट हो रहा है. इसकी वजह कोई नहीं.  नौटंकी?
'तुम लोग इतने इनइफेक्टेड कैसे हो.'

किसी रिश्ते को क्या कभी इस बात से भी याद किया जाएगा कि आखिरी सेंटेंस क्या था?
या 'तुम लोग हर काम तभी करते हो जब कोई चांस हो.'

कुछ कहानियों में संवाद ज़िंदगी बचाने वाली मशीन की बीप होती हैं. सिर्फ बीप बची रह जाती है. टेढ़ी ज़िंदगी से परेशान हम सब अपनों को सबसे प्यारे तब लगेंगे, तब किसी मशीन पर ज़िंदगी के धागे टेढ़े इधर से उधर जाते दिखाई दे रहे होंगे. बीप..बीप की आवाज़ करते हुए.

'अच्छा, तुम गुस्सा हो. अब नहीं जाऊंगा. ठीक होना है न. सॉरी. डॉक्टर भगा देगा मुझे.'

'डैन को पहचानती हो?'
कहां पहचानती थी वो उस डैन को, जो नहीं था. जब पूछा 'वेयर इज डैन?'

फिर भी शिउली तुम डैन को पहचानती हो?
'अगर हां तो लेफ्ट की तरफ आंख करो.' लेफ्ट की तरफ डैन है, जहां दिल होता है. लेफ्ट आंख के ऊपर एक तिल भी है. लड़कियों के तिल और दिल ही न देखे तो क्या देखा?

'शिउली पेड़ के नीच चादर बिछाकर कलेक्ट करती थी फाउंटन ऑफ फ्लार्स. उनका बहुत शॉर्ट लाइफ होता है. इसलिए शायद शिउली भी गिर गई.'

लेकिन गिरने से पहले शिउली ने रिसेप्शन से मच्छर मारते डैन को देखा था. गाड़ी ठीक करने के बाद डैन को थैंक्यू बोला था. उसे इरिटेट होते देखा था और ये समझा था कि ऐसे मौकों पर कुछ कहना नहीं होता. बस दूर से बेचैनी साझा करनी होती है. शिउली वही कर रही थी.  देख रही थी.

लेकिन इस देखती परेशान होती शिउली को डैन बस एक गिरा फूल दे पाया. फूल शिउली खुद थी, ये फूल जब गिरा तो नीचे चादर नहीं थी. लेकिन सुकून का एक अंगोछा था जो डैन लेकर आया.

'आंटी बड़े इज़ी वाले दे रहे हो आप इसे. इसे बोलो Q लिखे. देखा नहीं आता इसे. टफ वाले देते रहो आप इसे.'

लेकिन टफ वाला तो डैन के लिए था. उसने क्यों पूछा था कि डैन कहां है?



'कभी दूर जाने का सोचा था. कोमा में जाओगी, ये तो कभी नहीं सोचा होगा.
एक बात पूछूं- उस रात जब.... तुमने ये क्यों पूछा- वेयर इज डैन?''

जवाब हम सबके दिलों में है. कभी कभी मन करता है कि किसी के बारे में खूब बात करें. कितने ही साल हम उनके बारे में किसी से बात नहीं करते. अंधेरी सड़कों पर अकेले बाइक चलाएं तो शायद समझ आए.

'सोयी सोयी एक कहानी 
रूठी ख्वाब से 
जागी जागी आस सायानी 
लड़ी साँस से सांवरे'

या हो सकता है कुछ समझ न आए. तब काम आएंगे घर आंगन गांव में लगे पेड़... जिन्होंने कई पतझड़ सावन देखे होंगे.

मेरा पसंदीदा महीना दिसंबर, फरवरी रहे. मैंने एक महीना जोड़ लिया है, अक्टूबर.

अक्टूबर में शिउली के फूल आते हैं. जिनके गिरने और खिलने का कोई इंतज़ार कर रहा होगा.

इस इंतज़ार में कि वो बताएगी कि उसने क्यों पूछा- वेयर इज़ डैन?

और किसी रिश्ते का एक आख़िरी पूरा सेंटेंस एक सवाल नहीं... एक जवाब होगा.

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