संदेश

'रात के जले तारों को समझना कोहरा है'

पुढील स्थानक बम्बई, दिल्ली नाही

जगजीत सिंह: ओए जग्गी, भाई है तू मेरा...

चीख बंद हुई, पूल टूट गया

तकिए पर टिके सिर के साथ सब किताबें जला दी जाएंगी

किस्सा बर्खास्त

ज़िंदा कौमें 14 फरवरी का इंतज़ार नहीं करती

मुंह जले सूरज को रात की राख दिखाएंगे

चिल्लड़ को तरसता नायक हीन भारत

बची से ज्यादा कुची सी खुशियां मनाऊं कैसे?

'जलती लाश से निकल रही बदबू नहीं बन पाया'

'ताकि मुस्कियाने में एक फर्क कायम रहे'

'सबको शाम पसंद है, सबको इंतज़ार पसंद है'

घुसपैठिया बचपन कहीं का!

'जो प्रतिबद्ध है, वही लथपथ है'

ऐ मनाली, जहर है कि प्यार है तेरा चुम्मा?